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80th Independence Day

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दिनांक 15 अगस्त 2026 को वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून के परिसर संस्थान डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी संस्थान, टनकपुर में देश का 80वाँ स्वतंत्रता दिवस बड़े उत्साह, उल्लास एवं देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के निदेशक प्रो. हरद्वारी लाल मंडोरिया द्वारा ध्वजारोहण, राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ।
इस अवसर पर निदेशक प्रो. हरद्वारी लाल मंडोरिया ने अपने संबोधन में सभी मुख्य अतिथियों, प्रबंधन समिति के सदस्यगण, संकाय सदस्यों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को 80वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव मनाने का दिन नहीं है, बल्कि यह देश की स्वतंत्रता के लिए किए गए महान संघर्ष, त्याग एवं बलिदान को स्मरण करने का अवसर है। उन्होंने महात्मा गांधी, भगत सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद सहित देश के कोने-कोने से आए अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करते हुए कहा कि उनके बलिदान के कारण ही आज हम एक स्वतंत्र, संप्रभु एवं लोकतांत्रिक राष्ट्र में स्वतंत्रता के साथ जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

निदेशक महोदय ने कहा कि वर्ष 1947 में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश को एक सूत्र में पिरोने, राष्ट्र की एकता एवं अखंडता को मजबूत करने तथा बुनियादी संसाधनों का विकास करने की थी। आज 21वीं सदी में स्वतंत्रता के मायने और अधिक व्यापक हो गए हैं। वर्तमान समय में वास्तविक स्वतंत्रता केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता एवं तकनीकी आत्मनिर्भरता भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
एक इंजीनियरिंग संस्थान के निदेशक के रूप में उन्होंने स्वतंत्रता को तकनीकी दृष्टिकोण से जोड़ते हुए कहा कि आज के दौर में किसी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता में निहित है। उन्होंने कहा कि बीते दशकों में भारत ने सुई से लेकर सुपरकंप्यूटर, अंतरिक्ष अभियानों, डिजिटल तकनीक और आधुनिक वैज्ञानिक उपलब्धियों तक का लंबा सफर तय किया है। इस विकास यात्रा में भारतीय इंजीनियरों, वैज्ञानिकों एवं तकनीकी विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज देश की सुरक्षा और प्रगति में केवल सीमाओं पर तैनात जवानों की ही भूमिका नहीं है, बल्कि प्रयोगशालाओं, शोध संस्थानों एवं तकनीकी संस्थानों में कार्य कर रहे युवा इंजीनियर भी राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण प्रहरी हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, रिन्यूएबल एनर्जी, स्पेस टेक्नोलॉजी एवं डिजिटल तकनीक के इस युग में जो देश तकनीकी नेतृत्व करेगा, वही वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने की क्षमता रखेगा।
निदेशक महोदय ने ‘मेक इन इंडिया’ एवं ‘डिजिटल इंडिया’ की दिशा में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अब केवल विदेशों में विकसित तकनीकों का उपभोक्ता नहीं रहना चाहता, बल्कि अपने देश में अत्याधुनिक तकनीकों एवं उत्पादों का विकास कर उन्हें वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। चिप मैन्युफैक्चरिंग से लेकर डिफेंस टेक्नोलॉजी तक भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को वर्तमान समय की महत्वपूर्ण तकनीकी क्रांति बताते हुए कहा कि डेटा एवं एआई आने वाले समय में किसी भी देश की प्रगति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि एआई एवं आधुनिक तकनीक का उपयोग केवल तकनीकी उपलब्धि के लिए न करके स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, पर्यावरण एवं आम नागरिकों की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए किया जाए।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए निदेशक महोदय ने कहा कि वे केवल डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थी नहीं हैं, बल्कि ‘विकसित भारत’ के निर्माता हैं। उन्होंने कहा कि संस्थान का परिसर केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह विद्यार्थियों के विचारों, नवाचारों एवं तकनीकी प्रतिभा को विकसित करने और उन्हें वास्तविक समाधान एवं उद्यम में बदलने का मंच बनना चाहिए।

उन्होंने विद्यार्थियों को नवाचार (Innovation), स्थिरता (Sustainability) एवं उद्यमिता (Entrepreneurship) के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ऐसी तकनीक विकसित की जानी चाहिए जो भारत के गांवों, आम नागरिकों एवं समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन को सरल और बेहतर बनाए। साथ ही पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए ग्रीन टेक्नोलॉजी पर कार्य करने की आवश्यकता है।
निदेशक महोदय ने विद्यार्थियों को नौकरी खोजने वालों के बजाय नौकरी देने वाले बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भारत की युवा शक्ति में जोखिम उठाने, नए विचारों पर कार्य करने और स्टार्टअप के माध्यम से रोजगार के नए अवसर पैदा करने की क्षमता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने तकनीकी ज्ञान को उद्यमिता एवं राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता अपने साथ जिम्मेदारी भी लेकर आती है। संस्थान से शिक्षा प्राप्त करने के बाद विद्यार्थियों का लक्ष्य केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें समस्या समाधानकर्ता (Problem Solver) बनकर देश की वास्तविक समस्याओं—जैसे जल संकट, प्रदूषण, यातायात एवं बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं—के समाधान के लिए तकनीक का उपयोग करना चाहिए।
निदेशक महोदय ने ‘एथिक्स इन टेक्नोलॉजी’ पर विशेष जोर देते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा के युग में तकनीकी ज्ञान के साथ नैतिक दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है। विद्यार्थियों को ऐसी तकनीक विकसित करनी चाहिए जो मानवता और समाज के हित में हो तथा किसी भी प्रकार से समाज के लिए हानिकारक न हो। उन्होंने विद्यार्थियों को असफलताओं से न घबराने की प्रेरणा देते हुए कहा कि पहला कोड सफल न हो या पहला प्रोटोटाइप असफल हो जाए, तो उसे सीखने का अवसर मानना चाहिए और निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।

अपने संबोधन के अंत में निदेशक महोदय ने सभी से राष्ट्र निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमें केवल तकनीक के उपभोक्ता नहीं, बल्कि तकनीक के सर्जक बनना है। अपने ज्ञान, अनुसंधान एवं नवाचार का उपयोग समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन को बेहतर बनाने तथा भारत को ‘मेक इन इंडिया’ एवं ‘डिजाइन इन इंडिया’ का वैश्विक केंद्र बनाने में योगदान देने का संकल्प लेना चाहिए।
कार्यक्रम में संस्थान के डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ. अभिषेक पाठक, एकेडमिक डीन डॉ. अंजली सिंह सहित समस्त शिक्षकगण एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे। सभी ने स्वतंत्रता दिवस समारोह में उत्साहपूर्वक सहभागिता की तथा राष्ट्र की एकता, अखंडता एवं प्रगति के प्रति अपने दायित्वों को निभाने का संकल्प लिया।

समारोह का समापन धन्यवाद ज्ञापन एवं सभी प्रतिभागियों को मिठाई वितरण के साथ हुआ। स्वतंत्रता दिवस का यह आयोजन स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग एवं बलिदान को स्मरण करने के साथ-साथ तकनीकी आत्मनिर्भरता, नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता एवं विकसित भारत के निर्माण के प्रति सामूहिक संकल्प का संदेश देता है।
जय हिन्द! जय भारत!

Start Time

9:00 am

August 15, 2026

Finish Time

5:00 pm

August 15, 2026

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