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डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम राजकीय प्रौद्योगिकी संस्थान में हर्षोल्लास से मनाया गया 11वां स्थापना दिवस

1० वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा, उपलब्धियों और संस्थान से जुड़े अनगिनत भावनात्मक पलों का हुआ उत्सव

टनकपुर, 8 अगस्त 2026: डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम राजकीय प्रौद्योगिकी संस्थान, टनकपुर में संस्थान का 1०वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास, उमंग एवं आत्मीयता के साथ मनाया गया। यह अवसर केवल संस्थान की गौरवपूर्ण यात्रा का उत्सव नहीं था, बल्कि महान वैज्ञानिक, भारत रत्न एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के आदर्शों, विचारों और युवा शक्ति के प्रति उनके विश्वास को स्मरण करने का भी अवसर बना।

कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) एच.एल. मंडोरिया द्वारा विधिवत दीप प्रज्वलित कर किया गया। ज्ञान और प्रकाश के प्रतीक दीप प्रज्वलन के साथ ही स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ हुआ।

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन सदैव युवाओं को बड़े सपने देखने, उन सपनों को लक्ष्य में बदलने तथा निरंतर परिश्रम के माध्यम से उन्हें साकार करने की प्रेरणा देता रहा है। शिक्षा, विज्ञान, तकनीकी नवाचार और राष्ट्र निर्माण के प्रति उनकी सोच आज भी देश के युवाओं के लिए मार्गदर्शक है। इसी प्रेरणादायी भावना के साथ संस्थान के विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने स्थापना दिवस को विभिन्न सांस्कृतिक एवं रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से संस्थान को समर्पित किया।

कार्यक्रम का मंच संचालन सहायक प्राध्यापक अंजना मैम एवं छात्र प्रियांशु महार द्वारा प्रभावी एवं गरिमापूर्ण ढंग से किया गया। दोनों के कुशल मंच संचालन ने कार्यक्रम के विभिन्न चरणों को सहजता से जोड़े रखा तथा पूरे समारोह में उत्साह एवं ऊर्जा बनाए रखी।

समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। संस्थान के शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभाओं का प्रदर्शन करते हुए संस्थान के प्रति अपने प्रेम, सम्मान और कृतज्ञता को प्रस्तुतियों के माध्यम से अभिव्यक्त किया।

इस अवसर पर सहायक प्राध्यापक श्री शुभम थपलियाल एवं श्री योगेश चमोला ने सुंदर गढ़वाली गीत प्रस्तुत कर पूरे वातावरण को उत्तराखंड की लोक संस्कृति के रंग में रंग दिया। उनकी प्रस्तुति को उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा।

इसी क्रम में संस्थान के नॉन-टीचिंग स्टाफ सदस्य श्री मोहित गरकोटी ने मनमोहक कुमाऊंनी गीत प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति ने कुमाऊं की लोक संस्कृति और संगीत की मधुरता को कार्यक्रम में जीवंत कर दिया तथा उपस्थित लोगों को उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपरा से जोड़ा।

कार्यक्रम में साहित्य और कविता की भी सुंदर छटा देखने को मिली। संस्थान के स्टाफ सदस्य श्री अभिजीत यादव ने अपनी पुस्तक ‘रंगीन दुनिया के ब्लैक एंड व्हाइट किस्से’ से शायरी प्रस्तुत की। उनकी प्रस्तुति ने समारोह में साहित्यिक संवेदना, भावनात्मक गहराई और विचारों का सुंदर समावेश किया।

वहीं, छात्र प्रियांशु महार ने अपनी मधुर आवाज में भक्ति गीत प्रस्तुत कर वातावरण को आध्यात्मिक एवं भावपूर्ण बना दिया। उनकी प्रस्तुति ने समारोह में एक अलग ही भावनात्मक रंग भर दिया और उपस्थित सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इन सभी प्रस्तुतियों की विशेषता यह रही कि इन्हें संस्थान को समर्पित किया गया। विद्यार्थियों एवं संस्थान के सदस्यों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से यह अभिव्यक्त किया कि संस्थान ने उनके जीवन में केवल शिक्षा का माध्यम बनने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संस्थान ने उन्हें ज्ञान, आत्मविश्वास, अवसर, मार्गदर्शन, अनुभव और अपनी प्रतिभा को पहचानने एवं निखारने का मंच प्रदान किया है।

स्थापना दिवस के अवसर पर संस्थान की 1० वर्षों की यात्रा और उपलब्धियों को भी स्मरण किया गया। इन वर्षों में संस्थान ने शिक्षा एवं तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ नवाचार, रचनात्मकता, कौशल विकास, उद्यमिता एवं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर प्रयास किए हैं। संस्थान के विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों की उपलब्धियां इस गौरवपूर्ण यात्रा को और समृद्ध बनाती हैं।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) एच.एल. मंडोरिया ने विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों को संबोधित किया। उनका संबोधन समारोह का सबसे प्रेरणादायी एवं यादगार क्षण रहा। उन्होंने संस्थान की 1० वर्षों की यात्रा, उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए सभी को निरंतर उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

अपने संबोधन में निदेशक ने विद्यार्थियों को डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के जीवन, संघर्ष, सरलता और दूरदर्शी सोच से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने, निरंतर सीखते रहने, चुनौतियों एवं असफलताओं से घबराए बिना आगे बढ़ने तथा अपनी प्रतिभा एवं ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्र के विकास में करने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान की वास्तविक पहचान केवल उसके भवनों और संसाधनों से नहीं होती, बल्कि उसकी पहचान उसके विद्यार्थियों की सफलता, शिक्षकों के समर्पण तथा संस्थान के प्रत्येक सदस्य के योगदान से बनती है। उन्होंने सभी से संस्थान की गरिमा एवं प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में उप कुलसचिव (Deputy Registrar) डॉ. अभिषेक पाठक द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। उन्होंने स्थापना दिवस समारोह को सफल बनाने में योगदान देने वाले निदेशक, समस्त शिक्षकों, नॉन-टीचिंग स्टाफ एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों की सराहना करते हुए संस्थान की प्रगति एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

धन्यवाद ज्ञापन के साथ स्थापना दिवस समारोह का सफलतापूर्वक समापन हुआ। पूरे कार्यक्रम ने संस्थान परिवार में गौरव, अपनत्व, उत्साह और नई ऊर्जा का संचार किया।

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम राजकीय प्रौद्योगिकी संस्थान का 11वां स्थापना दिवस केवल एक समारोह नहीं, बल्कि 1० वर्षों की उपलब्धियों, अनगिनत यादों, आपसी जुड़ाव और भविष्य के नए संकल्पों का उत्सव बनकर सामने आया ।

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